मैं एक किसान हूँ।।

मैं एक किसान हूँ।।


देश का पेट भरने वाला, मैं देश का अभिमान हूँ,

खेत मेरा आशियाना और इस मिट्टी की मैं पहचान हूँ,

बैल मेरे साथी है औऱ हल का मैं सार्थीन हूँ,

कड़कती धूप में पसीना बहाता,

मैं एक किसान हूँ।।

समझ जाओगे किसान का दर्द,

एक बार खेतों में हल चलाकर तो देखो

किसी जमीन के टुकड़े में,

कभी अनाज उगाकर तो देखो

कभी बाजार में मांग ना होने पर,

सड़कों पर अपनी फसल फिंकवाकर तो देखो 

पूरी दुनिया को खाना खिलाकर,

अपने परिवार को भूखा रखवाकर तो देखो 

नहीं मांगता खैरात में किसी से कुछ,

एक बार मेरे मेहनत का फल दिलाकर तो देखो

'सोने की चिड़िया' फिर से बन जायेगा भारत,

एक बार किसान को उसका हक़ दिलाकर तो देखो


धीraj ✍🏻

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